
कुछ उलझे सवालों से डरता है दिल.. ना जाने क्यों तन्हाई में बिखरता है दिल, ना किसी को पाने की अब कोई चाहत ना रही.. बस कुछ अपनों को खोने से डरता है ये दिल..!!

बनाने वाले ने दिल कांच का बनाया होता.. तोड़ने वाले के हाथ में जख्म तो आया होता, जब भी देखता वो अपने हाथों को.. हमारा ख्याल तो आया होता..!!

जख्म जब मेरे सीने के भर जाएंगे.. आंसू भी मोती बनकर बिखर जाएंगे, यह मत पूछना किस-किस ने धोखा दिया.. वरना कुछ अपनो के चेहरे उतर जाएंगे..!!

जब खामोश निगाहों से बात होती है.. तो ऐसे ही मोहब्बत की शुरुआत होती है , हम तो बस खोए ही रहते हैं उनके ख्यालों में .. पता ही नहीं चलता कब दिन कब रात होती है ..!!

हुआ जब इश्क का एहसास उन्हें, आकर वह पास हमारे.. सारा दिन रोते रहे.. हम भी निकले खुदगर्ज इतने यारों की ओढ़कर कफन आंखें बंद करके सोते रहे..!!